Tuesday, October 15, 2013

भारत में स्तन कैंसर- कुछ आंकड़े


-    महिलाओं में औसतन 23 फीसदी कैंसर स्तन कैंसर होते हैं।

-    कैंसर से होने वाली कुल मौंतों में 50 फीसदी का कारण स्तन कैंसर है।

-    हर साल 1,15,000 नए स्तन कैंसर के मामले सामने आते हैं और 53,000 की मौत हो जाती है। यानी जब दो नए मामले सामने आते हैं तो एक मरीज की मौत हो जाती है।

- इंडियन काउंसिल फॉर मेडीकल रिसर्च (आईसीएमआर) के मुताबिक 2015 तक सालाना नए स्तन कैंसर का आंकड़ा ढाई लाख के आस-पास होगा।

-    करीब 70 फीसदी मामलों में स्तन कैंसर के मरीज के अस्पताल पहुंचने के समय ट्यूमर का आकार पांच से मी से ज्यादा यानी स्टेज 3 का होता है। सिर्फ 5 फीसदी मरीज पहली स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं।

-    स्तन कैंसर के सबसे ज्यादा मामले 45 से 55 की उम्र के बीच होते हैं।

-    करीब चौथाई मामलों में मरीज की उम्र 35 साल से कम होती है। 

(कम उम्र यानी बीमारी का तेज और ज्यादा फैलाव और बचने की कम संभावना।)

-    अस्पतालों, निदान और चिकित्सा सुविधाओं की बेतरह कमी।

- देश में दस लाख लोगों के लिए सिर्फ एक कैंसर विशेषज्ञ है। मास्टेक्टोमी यानी स्तन की सर्जरी के बाद सिर्फ 20 फीसदी मरीजों को ही रेडियोथेरेपी की सुविधा मिल पाती है, जो कि इलाज का एक महत्वूर्ण हिस्सा है।

-    महंगा और लंबा इलाज। स्तन कैंसर का इलाज आठ से दस महीने तक चलता है, जिसमें जरा भी देरी खतरनाक साबित हो सकती है। इलाज का निजी क्षेत्र में कम से कम खर्च कुछ लाख रुपए तक होता है।

-    सभी जगह इलाज की सुविधा उपलब्ध न होने से लोगों को बड़े शहरों में इलाज के लिए आना पड़ता है, जो कि पूरे परिवार के लिए असुविधाजनक है।

-    बीमारी की जल्द पहचान के लिए देश में व्यवस्थित स्तन कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम का अभाव है।


-    महिलाओं की सेहत, खास तौर पर स्तन की सेहत को लेकर बेध्यानी समाज में अब भी बहुत आम है। कैंसर से जुड़े भ्रम और सामाजिक रूप से नकारात्मक भावनाएं लोगों को इलाज के लिए आगे आने से रोकती हैं।

Sunday, October 13, 2013

जस्ट ज़िंदगी- इस गुलाबी महीने में स्तन कैंसर जागरूकता का रंग चढ़े तो बात है

अक्टूबर के इस महीने को पिंक्टोबर यानी गुलाबी अक्टूबर भी कहा जाता है। यह महीना दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के प्रति समर्पित है।

13 अक्टूबर का दिन खास तौर पर ब्रेस्ट कैंसर की चौथी स्टेज से निबटने संबंधी जागरूकता का है।

इस मौके पर संडे नवभारत टाइम्स के जस्ट ज़िंदगी पेज पर आज मेरा लेख-
ब्रेस्ट कैंसर- जल्द पहचान से बचती है जान

ई पेपर- http://epaper.navbharattimes.com/paper/15-9-13@10@2013-1001.html

Thursday, September 26, 2013

मेरे बालों में उलझी मां


मां बहुत याद आती है

सबसे ज्यादा याद आता है

उनका मेरे बाल संवार देना

रोज-ब-रोज

बिना नागा



बहुत छोटी थी मैं तब

बाल छोटे रखने का शौक ठहरा

पर मां!

खुद चोटी गूंथती, रोज दो बार

घने, लंबे, भारी बाल

कभी उलझते कभी खिंचते

मैं खीझती, झींकती, रोती

पर सुलझने के बाद

चिकने बालों पर कंघी का सरकना

आह! बड़ा आनंद आता

मां की गोदी में बैठे-बैठे

जैसे नैया पार लग गई

फिर उन चिकने तेल सने बालों का चोटियों में गुंथना

लगता पहाड़ की चोटी पर बस पहुंचने को ही हैं

रिबन बंध जाने के बाद

मां का पूरे सिर को चोटियों के आखिरी सिरे तक

सहलाना थपकना

मानो आशीर्वाद है,

बाल अब कभी नहीं उलझेंगे

आशीर्वाद काम करता था-

अगली सुबह तक



किशोर होने पर ज्यादा ताकत आ गई

बालों में, शरीर में और बातों में

मां की गोद छोटी, बाल कटवाने की मेरी जिद बड़ी

और चोटियों की लंबाई मोटाई बड़ी

उलझन बड़ी

कटवाने दो इन्हें या खुद ही बना दो चोटियां

मुझसे न हो सकेगा ये भारी काम

आधी गोदी में आधी जमीन पर बैठी मैं

और बालों की उलझन-सुलझन से निबटती मां

हर दिन

साथ बैठी मौसी से कहती आश्वस्त, मुस्कुराती संतोषी मां

बड़ी हो गई फिर भी...

प्रेम जताने का तरीका है लड़की का, हँ हँ



फिर प्रेम जो सिर चढ़ा

बालों से होता हुआ मां के हाथों को झुरझुरा गया

बालों का सिरा मेरी आंख में चुभा, बह गया

मगर प्रेम वहीं अटका रह गया

बालों में, आंखों के कोरों में

बालों का खिंचना मेरा, रोना-खीझना मां का



शादी के बाद पहले सावन में

केवड़े के पत्तों की वेणी चोटी के बीचो-बीच

मोगरे का मोटा-सा गोल गजरा सिर पर

और उसके बीचो-बीच

नगों-जड़ा बड़ा सा स्वर्णफूल

मां की शादी वाली नौ-गजी

मोरपंखी धर्मावरम धूपछांव साड़ी

लांगदार पहनावे की कौंध

अपनी नजरों से नजर उतारती

मां की आंखों का बादल



फिर मैं और बड़ी हुई और

ऑस्टियोपोरोसिस से मां की हड्डियां बूढ़ी

अबकी जब मैं बैठी मां के पास

जानते हुए कि नहीं बैठ पाऊंगी गोदी में अब कभी

मां ने पसार दिया अपना आंचल

जमीन पर

बोली- बैठ मेरी गोदी में, चोटी बना दूं तेरी

और बलाएं लेते मां के हाथ

सहलाते रहे मेरे सिर और बालों को आखिरी सिरे तक

मैं जानती हूं मां की गोदी कभी

छोटी कमजोर नाकाफी नहीं हो सकती

हमेशा खाली है मेरे बालों की उलझनों के लिए



कुछ बरस और बीते

मेरे लंबे बाल न रहे

और कुछ समय बाद

मां न रही

* नोट- कैंसर के दवाओं से इलाज (कीमोथेरेपी) से बाल झड़ जाते हैं

Wednesday, September 25, 2013

स्तन कैंसर से कोई नहीं मरता- यह सच है

स्तन कैंसर स्तन में शुरू होता है। जब तक यह स्तन तक सीमित है, इससे मरने का अंदेशा नहीं है।

जब तक स्तन कैंसर स्तन तक सीमित है, इसका इलाज भी अच्छी तरह से हो सकता है।

अगर स्तन कैंसर का इलाज समय पर न किया जाए तो यह स्तन से निकल कर हड्डियों, पेफड़ों, दिमाग, जिगर आदि में फैल जाता है।

स्तन कैंसर स्तन से बाहर के किसी अंग/अंगों में फैल जाए तो इसे स्टेज 4 या एडवांस स्टेज का या मेटास्टैटिक स्तन कैंसर कहते हैं।

हमारे देश में लोग यही समझते हैं कि स्तन कैंसर यानी मेटास्टैटिक स्तन कैंसर, क्योंकि मरीज जब पहले-पहल अस्पताल पहुंचते हैं तो उनमें से 80 फीसदी स्टेज 3 या 4 में होते हैं- यानी मामला हाथ से निकला ही समझो।

सिर्फ 20 फीसदी मरीज ही स्टेज 1 या 2 में अस्पताल पहुंच पाते हैं। इनके बचने, लंबा, स्वस्थ जीवन जीने की संभावना काफी बेहतर होती है।

लगभग 100 फीसदी मामलों में महिलाओं को खुद ही सबसे पहले पता चलता है कि उनके स्तन में कुछ बदलाव आए हैं जो सामान्य नहीं हैं। बिना किसी मशीनी जांच- मेमोग्राफी, एस आर आई, सीटी स्कैन के सिर्फ अपनी अंगुलियों से महसूस करके और आइने में देखकर जाना जा सकता है कि स्तन में कहीं कोई बदलाव, गड़बड़ी तो नहीं।

स्तन कैंसर जब स्तन में ही सीमित हो, तभी इसके प्रति सचेत होने की जरूरत है, ताकि बेहतर इलाज और बेहतर जिंदगी की गुंजाइश हो।


स्तन कैंसर जितनी जल्दी पहचाना जाता है, उसका इलाज उतना ही कम लंबा, कम खर्चीला, अपेक्षाकृत सरल और ज्यादा कारगर होता है। 

Wednesday, August 14, 2013

डबल मास्टेक्टोमी बरास्ता एंजलीना जोली फिर एक बार

अपने को प्रकाशित, प्रचारित करना मेरी फितरत में ज़रा कम है। इसलिए कई बार कुछ ऐसी बातों की जानकारी फैलाने में भी बड़ी देर लग जाती है, जो आत्म-प्रचार लगती हैं, पर उनका सरोकार बहुत से लोगों से है।

ऐसे ही, कोई दो महीने पहले हॉलीवुड स्टार एंजलीना जोली के डबल मास्टेक्टोमी (इसी बहाने मास्टेक्टोमी और डबल मास्टेक्टोमी जैसे टंग-ट्विस्टर, अनजाने कठिन तकनीकी अंग्रेज़ी शब्द जवान -बूढ़े सभी की ज़ुबान पर चढ़ गए।) पर हिंदुस्तानी मीडिया में जबर्दस्त चर्चा छिड़ी, जिसका दरअसल आम हिंदुस्तानी के लिए कोई अर्थ नहीं था। यह रसीली चर्चा इस अर्थ में सकारात्मक रही कि इसके बहाने स्तन कैंसर जैसे आम तौर पर वर्जित विषय पर बातें हुईं, लोगों की जानकारी बढ़ी।

उस हफ्ते में मेरी व्यस्तता भी बढ़ गई थी। विशेषज्ञ मरीज़ के तौर पर कई चैनलों और पत्रिकाओं ने मेरे विचारों को जानने में दिलचस्पी दिखाई।

ऐसा ही एक कार्यक्रम यू-ट्यूब पर अब भी मौजूद है। यह राज्यसभा टीवी पर अमृता राय का कार्यक्रम 'सरोकार' है जिसमें मेरे अलावा कैनसपोर्ट की हरमाला गुप्ता भी हैं। उसका लिंक इधर दे रही हूं।

http://www.youtube.com/watch?v=D-zNDX0QMDg

Thursday, August 1, 2013

कह दिया जो मन में था, भला-बुरा आप जानिए (2)




  • -      ईस्ट्रोजन तो खत्म हो गया। पहले रसायनों से दबाया गया, फिर ओवरीज़ निकाल कर, बकिया दवा से और दबा दिया गया। ज़िंदादिली कहां से आए। जिंदा शरीर और जिंदा दिल के बीच चुनना था। चुनाव कठिन नहीं था। धारा के साथ बह रही हूं। देह को बचाने में डॉक्टरों का साथ दे रही हूं। दिल का क्या है! शरीर रहेगा तो दिल भी थोड़ा-बहुत तो जी लेगा। वरना तो फिर कुछ नहीं है।
  • -      गुस्सा आता है कि दूसरे सहजता से पाते हैं, बिना परवाह किए, बिना जाने। ज़ाहिर है, पाने का शुक्राना भी नहीं देते। और देखती हूं, मेरे पास वह कुछ भी नहीं है जो मेरी उम्र में जीवन का प्राप्य होना था। “क्यों” का कोई जवाब नहीं है। आधारभूत बात यही है कि मेरे पास से वह सब चला गया, असमय, समय से बहुत पहले। और रह गई यह भावना कि क्यों नहीं खो जाने के पहले ही मैं भरपूर जी ली उन समयों को, रीति-नीति को ताक पर रख कर।
  • -      हार्मोन और दवा की लड़ाई में दवा जीतती है तो मैं बचती हूं। पर हार्मोन जीते तो मेरा दिल बचेगा। क्या करूं? दवा की जीत का समर्थन ही मेरे जीने का उद्देश्य रह गया है। दिल गया भाड़ में।
  • -      शायद कुछ चोरी हो गया है। भविष्य का एक हिस्सा, नीले आकाश का एक टुकड़ा जो पूरा मेरा हो सकता था।
  • -      मरने के पहले अपने जीवन का दुख मना ही लेना होगा। उन सबका जो धीरे-धीरे खोया जा रहा है, छूटता जा रहा है। आत्मविश्वास, मुस्कुराहटें, हंसी के हलके पल, बातों को हलके में लेने का जज़्बा...
  • -      कई बार लगने लगता है कि कैंसर से मेरी दोस्ती हो गई है, समझौता–सा हो गया, शांति स्थापित हो गई। और तभी एक जोरदार वार, सीधे पेट पर।
  • -      बीमार, थके हुए। उम्मीदों का खाली झोला लिए अस्पताल चले हैं डॉक्टरों से सौदा करने। झोले में कुछ प्रिस्क्रिप्शन, कुछ दवाएं, कुछ रिपोर्ट, रेडीमेड जूस का खाली डब्बा और किसी कोने में मुड़ा-तुड़ा अनदेखा-सा पड़ा एक खाली पुर्जा आशा का लिए लौट आते हैं।
  • -      अब तय करना होगा। चाहे जितनी भी छोटी या बड़ी हो, अधूरी हो, इसी से काम चलाना है। जिंदगी को काम पर लगाना है। बेरोजगार ज्यादा गुस्सा करता है, ज्यादा दुखी होता है, ज्यादा तकलीफ महसूस करता है। चलो काम पर लगें।
  • -      काम यानी पढ़ना, पियानो बजाना, किसी के लिए लिखना, सिलना-बुनना, फेसबुक पर सलाह-मशविरे लेना-देना, अस्पताल में मरीजों के साथ अनुभव बांटना, चित्र खींचना, कुछ लिखना जिसे पढ़कर लोग जानें कि क्या है यह ज़िंदगी, क्या करता है कोई इसका और यह क्या कर सकती है किसी का।

कह दिया जो मन में था, भला-बुरा आप जानिए (1)

  • -      मैं अकेली नहीं हूं जिंदगी के बियाबान में। लेकिन भीतर का यह अंधेरा जंगल हर किसी का अपना होता है। साझा तभी होता है जब उसके पेड़ साझा होते हैं, फलों की तलाश साझा होती है, पैरों के नीचे के दलदल की दुश्वारियां एक-सी होती हैं।
  • -      कभी जब लगने लगता है कि सब ठीक-ठाक है, खुशियां आस-पास हैं तभी कभी बेससाख्ता, अप्रत्याशित रुलाई फूट पड़ती है। धीमे-धीमे चलती मेरी देह घूम कर फर्श पर ढह जाती है।
  • -      दस्तरख्वान देखकर रोना आ सकता है कभी, कि इसमें मेरे खाने लायक क्यों कुछ नहीं। और जो है, उसमें से मैं क्या खाऊं, समझ में ही नहीं आता। कभी तो समझ नहीं पाती कि इसके अलावा क्या चाहती हूं। और यही बात मन के मुंह को कस कर बांधे रखने वाली डोरी को एक सिरे से खींच देती है। मुंह खुला और बह गया सब आंखों के रास्ते, एक बार में ही।
  • -      जानती हूं और मानती हूं कि अब रोना मेरा हक बनता है। रोकने की कोई सूरत नहीं, जरूरत भी नहीं। दिमाग कहता है रो लो और जितनी जल्दी हो सके फारिग होकर आगे बढ़ लो। पर मन वहीं कहीं अटका रहना चाहता है, जंगल में या जंगल के विचार में।
  • -      आम बातें, अच्छी बातें- हर बात पर नल खुल जाते हैं। न सिर्फ दर्द और संगीत, बल्कि हंसी और मज़ाक तक रुला देता है। नहीं पता होता कब उबल पड़ेंगे, उफन पड़ेंगे ये दो रिज़रवॉयर।
  • -      शरीर पर काबू कहां रहा। वह फुसफुसाता है कुछ बातें और मैं चुपचाप सुनती हूं।
  • -      इन हालात को खत्म करने की कोई दवा हो तो बताओ यारो।

क्रमशः...

कह दिया जो मन में था, भला-बुरा आप जानिए (2)

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